
बहुत से लोगों को लगता है कि डायबिटीज का असर सिर्फ ब्लड शुगर पर पड़ता है. लेकिन ऐसा नहीं है. डायबिटीज का असर आपके दांतों और मसूड़ों पर भी पड़ सकता है. और खास बात ये है कि इन दोनों का कनेक्शन दोनों तरफ से होता है. यानी डायबिटीज होने पर दांतों और मसूड़ों की दिक्कतों का खतरा बढ़ सकता है. अगर ओरल हेल्थ ठीक नहीं है, तो ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना भी मुश्किल हो सकता है.
जब ब्लड शुगर लंबे समय तक ज्यादा रहता है, तो लार में भी शुगर की मात्रा बढ़ जाती है. इससे मुंह में मौजूद नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका मिल जाता है. इसकी वजह से दांतों पर प्लाक जम सकता है, दांतों में कीड़ा लग सकता है और मसूड़ों की बीमारी भी हो सकती है.
लार का कम बनना
डॉक्टर शिखा शर्मा, डेंटल सर्जन कहती हैं कि डायबिटीज की वजह से कुछ लोगों के मुंह में लार भी कम बनने लगती है, जिससे मुंह सूखा सूखा रहने लगता है. लार हमारे मुंह से खाने के छोटे छोटे टुकड़े और बैक्टीरिया साफ करने में मदद करती है. इसलिए जब लार कम बनती है, तो दांतों में कैविटी और मुंह में इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ सकता है.
इसके अलावा, डायबिटीज में शरीर को ठीक होने में भी थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है. इसलिए मसूड़ों की छोटी सी परेशानी या दांतों का कोई इलाज होने के बाद भी रिकवरी में ज्यादा समय लग सकता है. लेकिन इसका असर सिर्फ एक तरफ नहीं होता. अगर मसूड़ों की बीमारी ज्यादा बढ़ जाए, तो शरीर में लगातार सूजन बनी रह सकती है.
इंसुलिन का ठीक से काम न कर पाना
इससे इंसुलिन का सही तरीके से काम करना मुश्किल हो सकता है और ब्लड शुगर को कंट्रोल करना भी कठिन हो सकता है. यानी कई बार एक ऐसा चक्र बन जाता है, जिसमें अनकंट्रोल्ड डायबिटीज मसूड़ों की बीमारी को बढ़ाती है और मसूड़ों की बीमारी ब्लड शुगर को कंट्रोल करना और मुश्किल कर देती है.
इसलिए दांतों और मसूड़ों का ख्याल रखना सिर्फ अच्छी स्माइल के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि डायबिटीज को मैनेज करने का भी एक जरूरी हिस्सा है. दिन में दो बार ब्रश करें, रोज़ दांतों के बीच की सफाई करें, समय समय पर डेंटिस्ट को दिखाएं और अपने ब्लड शुगर को डॉक्टर की बताई रेंज में रखने की कोशिश करें. इससे आपके दांत और मसूड़े ही नहीं, बल्कि आपकी पूरी सेहत भी बेहतर रह सकती है.