
सुप्रीम कोर्ट से हत्या मामले में दोषी ठहराए गए एक शख्स को बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे बुजुर्ग को जेल से रिहा करने का आदेश दिया है. ये खबर इसलिए खास है क्योंकि जिस बुजुर्ग की रिहाई का आदेश दिया गया है उनकी उम्र 105 साल है. कोर्ट के आदेश के बाद अब वो उम्र के इस पड़ाव में अपनी बाकी की जिंदगी अपने परिवार के साथ बिताएंगे.
जानकारी के मुताबिक बुजुर्ग शख्स का नाम रसिक चंद्र मंडल, जिनकी उम्र 105 साल है. उनका जन्म 1920 में हुआ था. रसिक पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के रहने वाले हैं. 1988 के हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे रसिक मंडल को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (21 अगस्त) को जेल से रिहा करने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि उनकी उम्र को देखते हुए उन्हें अब अपने जीवन के बाकी दिन परिवार के साथ बिताने की अनुमति दी जानी चाहिए.
1988 में हत्या के आरोप में गिरफ्तार
रसिक मंडल को 1988 में हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. उस समय उनकी उम्र 68 साल थी. दिसंबर 1994 में उन्हें हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. रसिक मंडल ने अपनी सजा के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में अपील की थी. करीब 24 साल बाद 2018 में हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी अपील खारिज कर दी.
रसिक मंडल को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां
उम्र बढ़ने के साथ रसिक मंडल को कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां होने लगीं. इसके बाद उन्हें जेल से निकालकर पश्चिम बंगाल के बालुरघाट स्थित सुधार गृह में रखा गया था. मंडल ने अपने बेटे के माध्यम से 2020 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इसमें उम्र और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का हवाला देते हुए समय से पहले रिहाई की मांग की गई थी. उस समय उनकी उम्र 100 साल के करीब थी.
समय से पहले रिहाई
29 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए अंतरिम जमानत या पैरोल पर रिहाई का आदेश दिया था. कोर्ट ने मालदा के मानिकचक थाने में 9 नवंबर 1988 को दर्ज मामले में उन्हें अंतरिम राहत दी थी. वहीं अब CJI सूर्यकांतकी अध्यक्षता वाली बेंच ने रसिक मंडल की उम्र को ध्यान में रखते हुए कहा कि अंतरिम रिहाई को जेल से ‘समय से पहले रिहाई’ में बदल दिया जाना चाहिए.
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि आजीवन कारावास की अवधि पूरी नहीं हुई हो, तब भी रकिक मंडल को दोबारा जेल नहीं भेजा जाएगा. शुक्रवार को सुनवाई के दौरान बेंच ने सवाल किया, क्या वह जीवित हैं? उन्हें स्थायी रूप से रिहा क्यों नहीं किया जाना चाहिए? उन्हें अंतरिम पैरोल पर क्यों रखा जाए?’.
स्थायी रूप से जेल से रिहा करने का आदेश
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि कोर्ट यह निर्देश दे सकता है कि उन्हें अब इस मामले में दोबारा जेल न भेजा जाए. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा ‘उनकी उम्र को देखते हुए, हमें उन्हें रिहा न करने का कोई कारण नहीं दिखता. हम उनकी रिट याचिका को स्वीकार करते हुए 29 नवंबर, 2024 के आदेश को अंतिम रूप देते हैं. इस मामले के लिए उन्हें स्थायी रूप से जेल से रिहा किया जाता है’. कोर्ट ने उनकी याचिका मंजूर करते हुए 29 नवंबर 2024 के अंतरिम आदेश को स्थायी कर दिया. 105 साल की उम्र में मिली मंडल को यह आजादी अब उन्हें अपने परिवार के साथ जीवन के बाकी दिन बिताने का मौका देगी.