ठंड में तैयार करें परवल, मार्च में मिलने लगेगी फसल, किसान ने बताया फॉर्मूला

जनवरी की कड़ाके की सर्दी में ठंडी हवाओं के बीच परवल की खेती करना किसानों के लिए चुनौती भरा काम माना जाता है. लेकिन सही तकनीक अपनाई जाए तो सर्दी में भी परवल की खेती आसानी से की जा सकती है. सर्दी में परवल की खेती करने वाले सीतामढ़ी के प्रगतिशील किसान सुरेश महतो ने बताया कि सबसे पहले खेत की अच्छी तरह जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाना जरूरी है. इसके बाद प्रति एकड़ 80–100 क्विंटल अच्छी तरह सड़ी गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालकर जमीन की उर्वरता बढ़ा दी जाए. जनवरी के पहले पखवाड़े में क्यारियां ऊंची बनाई जानी चाहिए ताकि नमी संतुलित रहे और पौधे ठंडे पानी के सीधे संपर्क में न आएं. परवल की खेती बीज से नहीं, बेल के स्वस्थ टुकड़ों से करना ज्यादा उचित माना जाता है, इससे पौधे जल्दी तैयार होते हैं और मौसम का दबाव कम पड़ता है. रोपाई के 10 से 12 दिन बाद हल्की सिंचाई जरूरी है, लेकिन किसान सुरेश महतो की सलाह मानें तो ठंड के मौसम में पानी का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करना चाहिए. ज्यादा पानी जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसे में उनका कहना है कि सिर्फ उतनी ही सिंचाई करें जिससे मिट्टी में सिर्फ नमी बनी रहे. पौधों के आसपास पुआल, सूखी पत्तियां या मल्च बिछा देने से जड़ों को गर्माहट मिलती है और ठंड का असर कम हो जाता है. रात के समय लो-टनल कवर या पॉलिथीन से ढकने पर ठंडी हवाओं से पौधे बचे रहते हैं. इस तरह शुरुआती माह में पौधे मजबूत हो जाते हैं. करीब 25–30 दिन बाद जब पौधे तेजी से बढ़ने लगते हैं तो बेलों को सहारा देना जरूरी हो जाता है. सुरेश महतो बताते हैं कि मचान बनाकर या जालीदार सहारा देकर बेल को ऊपर चढ़ाने से पौधा सुरक्षित रहता है और रोग-कीट का प्रकोप घटता है.
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