यदि राज्य या जांच एजेंसियां किसी आरोपी के त्वरित सुनवाई के अधिकार की रक्षा करने में असमर्थ हैं तो केवल अपराध की गंभीरता का आधार लेकर जमानत का विरोध नहीं किया जा सकता. अदालत ने कई मामलों का हवाला देते हुए कहा कि लंबी विचाराधीन कैद जमानत के पक्ष में निर्णायक कारक है.