खाली पदों का ब्योरा दे सरकार नियमित भर्ती नहीं होने पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

खाली पदों का ब्योरा दे सरकार नियमित भर्ती नहीं होने पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सभी विभागों में स्वीकृत रिक्त पदों का पूरा डेटा हलफनामे के माध्यम से पेश करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने नियमित भर्ती प्रक्रिया में देरी और संविदा/अस्थायी नियुक्तियों पर गंभीर चिंता जाहिर की है. कोर्ट के इस आदेश के बाद ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले समय में युवाओं को सरकारी नौकरी की राह खुलेगी. जो सालों से सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे हैं. पूरे मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी.

कोर्ट ने मामले पर सुनवाई के दौरान साफ तौर पर कहा कि एक तरफ पूरे प्रदेश में युवा सरकारी नौकरियों का इंतजार कर रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ सरकारी नौकरियों के इंतजार में ‘ओवर एज’ हो रहे हैं. इसके बाद भी सरकार नियमित पदों पर को भरने के बजाय आउटसोर्स और अस्थायी माध्यमों से काम चला रही है.

जस्टिस राकेश थपलियाल कोर्ट ने इस प्रथा को पूरी तरह से ‘शोषणकारी’ और ‘तर्कहीन’ करार दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने सवाल किया कि जहां भी इस तरह के सरकारी पद खाली हैं,वहां भर्ती क्यों नहीं हो रही है.

भर्ती प्रक्रिया आगे न बढ़ाना निष्क्रियता

याचिका के दायरे को व्यापक करते हुए और युवा पीढ़ी को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने कहा कि बड़ी संख्या में योग्य और पात्र युवा नियमित नियुक्तियों की प्रतीक्षा में हैं. न्यायालय ने कहा कि रिक्तियां मौजूद हैं, लेकिन संबंधित अधिकारी नियमित भर्ती प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा रहे हैं, जो राज्य प्रशासन की निष्क्रियता दर्शाता है.

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि प्रत्येक विभाग में स्थायी और स्वीकृत रिक्तियों की बड़ी संख्या होने के बावजूद नियमित चयन प्रक्रिया अपनाने के बजाय इन पदों को अनुबंध, दैनिक वेतनभोगी और तदर्थ कर्मचारियों के माध्यम से भरा जा रहा है जिसे गंभीर चिंता का विषय बताया.

कोर्ट ने दिया हलफनामा दाखिल करने का आदेश

अपने आदेश में न्यायालय ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे सभी विभागों से स्वीकृत रिक्तियों का पूरा ब्योरा एकत्र कर हलफनामा दाखिल करें. साथ ही यह भी स्पष्ट करें कि स्थायी, नियमित और स्वीकृत पदों के उपलब्ध होने के बावजूद नियमित भर्ती प्रक्रिया क्यों शुरू नहीं की जा रही है. कोर्ट ने यह भी पूछा कि श्रेणी-चार के पदों को डेड कैडर क्यों घोषित किया गया है?

यदि सरकार डेटा पेश करती है और कोर्ट संतुष्ट नहीं होता है, तो वह सीधे तौर पर बड़े पैमाने पर भर्ती अभियान शुरू करने का आदेश दे सकती है. अगर ऐसा होता है तो युवाओं को रोजगार का अच्छा मौका मिल सकता है.

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