छत्तीसगढ़: CD केस में भूपेश बघेल को CBI कोर्ट से झटका, बरी करने वाला आदेश रद्द

छत्तीसगढ़: CD केस में भूपेश बघेल को CBI कोर्ट से झटका, बरी करने वाला आदेश रद्द

रायपुर की विशेष सीबीआई कोर्ट ने शनिवार को पारित अपने आदेश में मजिस्ट्रेट अदालत के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमें छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पूर्व कैबिनेट मंत्री (पीडब्ल्यूडी) राजेश मुनत से जुड़े अश्लील वीडियो मामले में डिस्चार्ज कर दिया गया था. इसी आदेश में विशेष सीबीआई अदालत ने अन्य आरोपियों कैलाश मुरारका, विनोद वर्मा और विजय भाटिया द्वारा ट्रायल कोर्ट के आरोप तय करने के आदेश के खिलाफ दायर अपील को भी खारिज कर दिया.

ये मामला वर्ष 2017 में दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप था कि पूर्व मंत्री राजेश मुनत की छवि खराब करने के उद्देश्य से उनके कथित अश्लील वीडियो बनाए गए और उन्हें प्रसारित किया गया, बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी. सीबीआई ने इस मामले में कुल छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट और पूरक चार्जशीट दाखिल की थी. मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है.

CBI कोर्ट ने पलटा आदेश

दरअसल सीबीआई की एक विशेष अदालत ने शनिवार को मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को 2017 में पूर्व मंत्री राजेश मूनत को कथित तौर पर दर्शाने वाले एक अश्लील वीडियो के प्रसार से संबंधित मामले में बरी कर दिया गया था.

भूपेश बघेल समेत कई नामजद

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने आरोपपत्र में भूपेश बघेल समेत कई आरोपियों को नामजद किया था. सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले का मतलब है कि भूपेश बघेल को इस मामले में मुकदमे का सामना करना पड़ेगा, जब तक कि उन्हें उच्चतर अदालत से राहत नहीं मिल जाती.

आरोप तय करने के आदेश के खिलाफ अपील खारिज

मामले से वाकिफ एक अधिकारी ने बताया, इसी कार्यवाही में अदालत ने अन्य आरोपियों कैलाश मुरारका, विनोद वर्मा और विजय भाटिया द्वारा निचली अदालत के आरोप तय करने के आदेश के खिलाफ दायर अपील को भी खारिज कर दिया. छत्तीसगढ़ पुलिस ने 2017 में तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री मूनत और बीजेपी के नेता प्रकाश बजाज द्वारा दायर अलग-अलग शिकायतों के आधार पर दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कीं. बाद में छत्तीसगढ़ की तत्कालीन बीजेपी नीत सरकार ने इन मामलों को सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया. सीबीआई ने इस मामले में एक आरोपपत्र और एक पूरक आरोपपत्र दाखिल किया.

सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया था कि पहला मामला 26 अक्टूबर, 2017 को रायपुर के पंदरी थाने में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ इस आरोप पर दर्ज किया गया था कि शिकायतकर्ता (बजाज) को फोन पर एक अज्ञात व्यक्ति ने कहा था कि उसके पास उसके ‘आका’ का एक अश्लील वीडियो है और धमकी दी थी कि अगर उसकी फिरौती की मांग पूरी नहीं की गई तो वह इसे वायरल कर देगा.

छवि खराब करने और राजनीतिक लाभ की कोशिश

अधिकारी के अनुसार, कांग्रेस की छत्तीसगढ़ इकाई के अध्यक्ष भूपेश बघेल और वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा के खिलाफ 27 अक्टूबर, 2017 को रायपुर के सिविल लाइंस थाने में दूसरा मामला दर्ज किया गया था. इसमें उन पर मूनत के फर्जी अश्लील वीडियो को विभिन्न सोशल मीडिया मंच पर उनकी छवि खराब करने और राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए प्रसारित करने के आरोप लगाए गए थे.

वहीं विनोद वर्मा और भूपेश बघेल ने आरोपों से इनकार किया. यह मामला तब सामने आया जब अक्टूबर 2017 में छत्तीसगढ़ पुलिस ने विनोद वर्मा को उनके गाजियाबाद स्थित आवास से ब्लैकमेल और जबरन वसूली के संदेह में गिरफ्तार किया.

चरित्र हनन के प्रयास का आरोप

जब विनोद वर्मा को पुलिस द्वारा ले जाया जा रहा था, तो उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार उनसे खुश नहीं थी क्योंकि उसे संदेह था कि उनके पास ‘छत्तीसगढ़ के (तत्कालीन) पीडब्ल्यूडी मंत्री राजेश मूनत की एक अश्लील सीडी’ थी और कहा कि उन्हें फंसाया जा रहा था. मूनत ने इसे फर्जी और चरित्र हनन का प्रयास बताया था.

error

Enjoy this blog? Please spread the word :)

RSS
Follow by Email
Pinterest
LinkedIn
Share
Telegram
WhatsApp
Reddit