BMC में बहुमत की जंग, महायुति में मेयर पद को लेकर मंथन तेज, कहां अटका पेंच?

BMC में बहुमत की जंग, महायुति में मेयर पद को लेकर मंथन तेज, कहां अटका पेंच?

मुंबई महानगरपालिका (BMC) में सत्ता के लिए 114 सीटों का जादुई आंकड़ा पार करना जरूरी है. मौजूदा परिणामों में भारतीय जनता पार्टी के पास 89 सीटें हैं, यानी बहुमत से 25 सीटें कम हैं. वहीं, महायुति में भाजपा के साथ चुनाव लड़ने वाली शिवसेना (शिंदे गुट) के पास 29 सीटें हैं. दोनों दल मिलकर आसानी से बीएमसी की सत्ता पर काबिज हो सकते हैं, लेकिन यहां एक बड़ा पेंच फंसा हुआ है.

सूत्रों के मुताबिक, शिंदे गुट के नेता चाहते हैं कि मेयर की कुर्सी ढाई-ढाई साल के फार्मूले पर साझा की जाए. इसी रणनीति के तहत शिंदे गुट भाजपा पर दबाव बनाकर उपमहापौर और स्टैंडिंग कमिटी अध्यक्ष जैसे अहम पद भी अपने खाते में लेना चाहता है. बीएमसी में स्टैंडिंग कमिटी अध्यक्ष को सबसे महत्वपूर्ण पद माना जाता है. इसी कड़ी में, शिंदे गुट के 29 नवनिर्वाचित पार्षद शनिवार को ताज लैंड्स एंड, बांद्रा में बैठक करते नजर आए. बैठक में क्या चर्चा हुई, यह आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया.

ढाई साल का मेयर पद शिंदे गुट की मांग

इस बैठक को लेकर बताया जा रहा है कि स्टैंडिंग कमिटी और इम्प्रूवमेंट कमिटी में हिस्सेदारी के साथ ढाई साल का मेयर पद शिंदे गुट की प्रमुख मांग है. रविवार को दोनों दलों के नेताओं के बीच बैठकों का दौर जारी रहने की संभावना है. हालांकि एकनाथ शिंदे मेयर पद पर सवाल पूछने पर जवाब देने से बच रहे है. विकास के मुद्दे पर महायुति की जीत हुई है और हम विकास पर ही फोकस कर रहे हैं. वैसे महायुति में रहते हुए भी शिंदे गुट किंगमेकर की भूमिका में उभरता दिख रहा है. सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि शिंदे गुट के बिना भाजपा के लिए बीएमसी की सत्ता तक पहुंचना मुश्किल होगा.

फडणवीस को मेयर की कुर्सी तक न पहुंच पाने की कसक

बीएमसी में अकेले दम पर मेयर की कुर्सी तक न पहुंच पाने की कसक देवेंद्र फडणवीस के बयान में भी झलकी है भाजपा कार्यालय में नवनिर्वाचित नगरसेवकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, हकीकत में हमारी कुछ सीटें 100120 वोटों से रह गईं, वरना हमारा शतक पूरा होता, लेकिन मुंबई की जनता ने जो दिया है, वह भरपूर है. कुछ लोग कहते हैं कि पहले 82 आए थे, अब 89 आए हैं- तो क्या बड़ा काम किया? उन्हें यह नहीं पता कि पहले 227 जगहों पर लड़कर 82 आए थे, इस बार 135 जगहों पर लड़कर 89 आए हैं.

क्या ढाई ढाई साल के फार्मूले पर बात चल रही बात?

इस सवाल का जवाब देते हुए सीएम फडणवीस ने कहा कि हम मेयर को लेकर एकनाथ शिंदे से बैठकर बात करेंगे. मेयर कौन और किसका होगा, इस पर दोनों दल के नेता बैठकर बात करेंगे. इस पर कोई विवाद नहीं होगा. अच्छे तरीके से हम दोनों दल ये बीएमसी चलाकर दिखाएंगें.

उद्धव ठाकरे का पलटवार, बोले- निष्ठा कभी नहीं बिकती

इधर, उद्धव ठाकरे ने शनिवार को मातोश्री पर 65 नवनिर्वाचित पार्षदों से मुलाकात की. उन्होंने कहा, “आप सब निष्ठावान हैं, तभी आज तक पैसों की ताकत के सामने नहीं झुके. भाजपा और हमारे बीच फर्क है. कागजों पर भले ही शिवसेना को खत्म करने की कोशिश की गई हो, लेकिन जमीन पर लोगों के दिलों से शिवसेना को कोई खत्म नहीं कर सकता. साम, दाम, दंड, भेद और एजेंसियों के जरिए गद्दारों को खरीदा जा सकता है, लेकिन निष्ठा कभी नहीं बिकती.”

उन्होंने आगे कहा, “मेयर बनना हमारा सपना है। अगर ईश्वर की इच्छा होगी तो वह भी पूरा होगा. गद्दारी से मिली जीत पाप है। हमारे पास तन और मन है, उनके पास सिर्फ धन. आने वाली पीढ़ी को गर्व होगा कि हमने पैसों के लिए सत्ता का सुख नहीं लिया और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया. कुल मिलाकर, बीएमसी में सत्ता गठन की तस्वीर आने वाले दिनों की बैठकों और पदों के बंटवारे से साफ होगी. मेयर पद, स्टैंडिंग कमिटी और अन्य प्रमुख समितियों को लेकर महायुति के भीतर खींचतान फिलहाल जारी है.”

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