आजतक की पड़ताल में सामने आया कि निर्माण स्थल अब एक जंगल जैसा नजर आता है. चारों तरफ ऊंची झाड़ियां उग आई हैं. यहां 35 करोड़ रुपये की लागत से 840 फ्लैट बनकर तैयार तो हो गए हैं, लेकिन पिछले 6 साल से महज 1.5 करोड़ रुपये के ‘फिनिशिंग फंड’ के अभाव में ये आशियाने खंडहर में तब्दील हो रहे हैं.