बिहार में ऐसी कई महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाएं हैं जो सालों से अधूरी पड़ी हैं. डेडलाइन बार-बार बदली गई, लागत कई गुना बढ़ गई, लेकिन जिम्मेदारी तय नहीं हुई. आजतक ने ऐसी ही तमाम परियोजनाओं पर दस्तक दी है, जो सरकारी सिस्टम की सुस्ती और लापरवाही के कारण ‘सफेद हाथी’ बन चुकी हैं.
