
Commonwealth Games 2026 में भारतीय एथलीट गुलवीर सिंह ने कमाल कर दिया है. उनकी कामयाबी सिर्फ मेडल जीतने तक सीमित नहीं है बल्कि भारत के नजरिए से ऐतिहासिक भी है. क्योंकि, उन्होंने जो करके दिखाया है, वो उनसे पहले CWG में किसी ने किया भी नहीं है. वो एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स के 2 अलग-अलग मेडल जीतने वाले भी पहले भारतीय बन गए हैं. अब ऐसे कारनामें को इतिहास रचना नहीं कहेंगे तो फिर क्या कहेंगे? लेकिन, क्या आप जानते हैं कि भारत के नंबर 1 लॉन्ग डिस्टेंस रनर बन चुके गलवीर सिंह को ऐसा करने की शक्ति कहां से मिलती है? ये शक्ति मिलती है हनुमान जी की भक्ति से, जिसके बारे में गुलवीर सिंह ने खुद 5000 मीटर की रेस में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद खुलासा किया.
हनुमान जी बहुत साथ देते हैं- गुलवीर सिंह
गुलवीर सिंह NNIS को दिए इंटरव्यू में खुद को हनुमान जी का भक्त बताया और कहा कि वो हर रोज उनकी पूजा करते हैं. इतना ही नहीं उन्होंने ये भी बताया कि हनुमान जी उनका बहुत साथ देते हैं. गुलवीर ने ये बयान तब दिया जब उनसे उनके माथे पर टिका लगाने को लेकर सवाल हुआ.
“I am not much happy. I wanted to hear the national anthem for my country,”
I offer prayers to Lord Hanuman every day. He is my guiding force and has always stood by me.
On being asked if Africans are invincible :
The Govt is investing so much in us. They are human, and we— The Khel India (@TheKhelIndia) August 1, 2026
ब्रॉन्ज जीतकर क्यों खुश नहीं गुलवीर सिंह?
गुलवीर सिंह ने इंटरव्यू के दौरान बताया कि वो 5000 मीटर की रेस में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर उतने खुश नहीं हैं. उन्होंने कहा कि उनकी तमन्ना खेलों के बड़े मंच पर अपने देश का राष्ट्रगान सुनने की थी. गुलवीर सिंह ने इससे पहले CWG 2026 के 10000 मीटर की रेस में सिल्वर मेडल जीता था.
‘वो भी हमारी तरह इंसान हैं, हम उन्हें हराएंगे’
भारतीय सेना में नायक सुबेदार के पद पर तैनात गुलवीर सिंह ने लॉन्ग डिस्टेंस रनिंग में अफ्रीकी धावकों के बरकरार दबदबे को लेकर पूछे सवाल पर भी अपनी राय जाहिर की. उन्होंने कहा कि वो भी हमारी तरह इंसान ही हैं, फिर हम उन्हें क्यों नहीं हरा सकते? वो भी तब जब सरकार हम पर इतना खर्च कर रही है. हमारी सुविधाओं का ख्याल रख रही है. हमें वर्ल्ड क्लास कोच और दूसरी सहायताएं दी जा रही है. हम उन्हें क्यों नहीं हरा सकते? हम उन्हें हराएंगे.