
इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, दिल्ली (IFFD) के रूप में राजधानी ने सिनेमा, संस्कृति और रचनात्मक ऊर्जा का एक भव्य संगम देखा. भारत मंडपम में आयोजित नाइट ऑफ ऑनर्स समारोह में दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस वैश्विक आयोजन में हिस्सा लिया. इस अवसर पर दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा भी मौजूद रहे.
कार्यक्रम में फिल्म निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा, अभिनेता अनुपम खेर, अभिनेत्री भूमि पेडनेकर, दिव्या दत्ता, अर्जन बाजवा सहित देश-विदेश की अनेक प्रतिष्ठित फ़िल्म हस्तियां उपस्थित रहीं. निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी को शोले के 50 वर्ष पूरे होने पर सम्मानित किया गया.
समारोह में विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सम्मान समारोहों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया. अभिनेता अनुपम खेर की काव्यात्मक प्रस्तुति और ग्रैमी विजेता संगीतकार रिकी केज के संगीत ने कार्यक्रम को भावनात्मक ऊंचाई प्रदान की.
एलजी ने फिल्मकारों को बताया सांस्कृतिक दूत
इस अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि इस फिल्म महोत्सव का आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं है, यह दिल्ली और भारत को क्रिएटिव इकोनॉमी का वैश्विक केंद्र बनाने की एक दृष्टि है. उन्होंने कहा कि भारतीय मिट्टी में जन्मी कहानी दूर देशों के दिलों को छू सकती है और ऐसे मंच उन कहानियों को दुनिया तक पहुंचाने का सेतु बनते हैं. दिल्ली की भूमिका यहां और भी विशेष है.
उन्होंने फिल्मकारों से कहा कि आप सिर्फ रचनाकार नहीं, आप सांस्कृतिक दूत हैं. सिनेमा केवल फ्रेम्स और स्क्रिप्ट्स नहीं, यह साहस है, दृष्टिकोण है, और सच्चाई है. उन्होंने कहा कि आज जिनको सम्मान मिल रहा है आप सभी को हार्दिक बधाई और जिन्हें नहीं मिला, याद रखिए, हर वह कहानी जो दर्शकों तक पहुंची, वह अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि है. उपराज्यपाल ने कहा कि यह एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन की नींव रखी है, जो दिल्ली के सांस्कृतिक भविष्य को दिशा देगा और भारत को वैश्विक रचनात्मक मानचित्र पर और सशक्त बनाएगा.

राजधानी को मिल रही नई सांस्कृतिक पहचान
इस अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली देश का हृदय है, एक ऐसा शहर जो इतिहास और आशाओं दोनों को अपने भीतर समेटे हुए है. यह फिल्म महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि राजधानी की नई सांस्कृतिक पहचान को आकार देने का माध्यम है. सिनेमा में लोगों को जोड़ने, प्रेरित करने और सपनों को साकार करने की अद्भुत शक्ति है. यह मंच नए कलाकारों, फिल्म निर्माताओं और विशेष रूप से महिलाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देगा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि IFFD दिल्ली को एक वैश्विक सांस्कृतिक और सिनेमाई केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने इस आयोजन को ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ और रचनात्मक उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में एक सशक्त पहल बताया. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महोत्सव केवल सिनेमा का उत्सव नहीं, बल्कि संवाद, नवाचार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक जीवंत मंच है, जो दिल्ली को वैश्विक रचनात्मक केंद्र के रूप में स्थापित करेगा.

IFFD में 6 फिल्म प्रोजेक्ट्स शॉर्टलिस्ट
पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में हमारा लक्ष्य सिर्फ एक फिल्म फेस्टिवल आयोजित करना नहीं है, बल्कि दिल्ली को क्रिएटिविटी, इनोवेशन और सिनेमा के एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है.
उन्होंने बताया कि IFFD में 6 फ़िल्म प्रोजेक्ट्स को शॉर्टलिस्ट किया गया, और मुझे गर्व है यह कहते हुए कि इस फेस्टिवल से निकलने वाली 3 फिल्में आने वाले समय में पूरे देश में देखी जाएंगी. कपिल मिश्रा ने कहा कि फ़िल्म परिदृश्य बदला है. देशभक्ति और देश सेवा से जुड़ी फिल्मों की लोकप्रियता नई पीढ़ी में बढ़ रही है. देश की सुरक्षा और सेवा करने वाले नायकों को फिल्मों में जगह मिल रही है. मंत्री कपिल मिश्रा ने फ़िल्म जगत से जुड़े सभी लोगों से आग्रह किया कि देश में 100 करोड़ कमाने वाली फिल्में बनाने के साथ 100 करोड़ लोगों को जगाने वाली फिल्में भी बनाते रहें.

IFFD 2026 की प्रमुख झलकियां
- कार्यक्रम के दौरान विभिन्न श्रेणियों में सम्मान प्रदान किए गए. फिल्म निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा और IFFD प्रीव्यू कमेटी के चेयरपर्सन सुनीत टंडन को सम्मानित किया गया. इसके साथ ही कैपिटल्स प्राइड सम्मान के तहत गुणीत मोंगा, दिव्या दत्ता और भूमि पेडणेकर सहित कई प्रमुख हस्तियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया.
- कार्यक्रम में 50 वर्षों की ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाते हुए शोले को विशेष श्रद्धांजलि दी गई, जिसने दर्शकों में भावनात्मक जुड़ाव का वातावरण बनाया. वहीं, AI फिल्ममेकिंग हैकाथॉन के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया, जो सिनेमा के नए और उभरते स्वरूपों की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है.
- अपने प्रथम वर्ष में ही इस महोत्सव ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की. 100 से अधिक देशों से 2,100 से अधिक फिल्म प्रविष्टियां प्राप्त हुईं, जबकि 47 देशों की 125 से अधिक फिल्मों का प्रदर्शन 15 से अधिक स्थलों पर किया गया. 30,000 से अधिक पंजीकरण इस बात का प्रमाण हैं कि यह महोत्सव जन-जन तक पहुंचा है और व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित हुई है.
- इस वर्ष स्पेन को ‘फोकस देश’ तथा सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव को आधिकारिक साझेदार के रूप में शामिल किया गया, जिससे आयोजन को वैश्विक आयाम मिला. दिल्ली के विभिन्न स्थलों पर आयोजित इस महोत्सव ने इसे केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि एक शहर-व्यापी सांस्कृतिक आंदोलन का रूप दे दिया.
- महोत्सव के अंतर्गत आयोजित सिने एक्सचेंज ने फिल्म उद्योग के लिए एक सशक्त मंच के रूप में कार्य किया, जहां 15 सह-निर्माण परियोजनाएं और 4 निर्माणाधीन परियोजनाएं प्रस्तुत की गईं. वहीं सिनेवर्स एक्सपो के माध्यम से नीति, तकनीक और फिल्म से जुड़ी विरासत का व्यापक प्रदर्शन हुआ, जिसमें 12 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की सक्रिय भागीदारी रही.
- अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के साथ-साथ भारतीय मुख्यधारा और क्षेत्रीय सिनेमा (12 भाषाओं में), वृत्तचित्र, लघु फिल्में, प्रयोगात्मक सिनेमा तथा AI-आधारित फिल्मों को भी मंच प्रदान किया गया. शोले, रंग दे बसंती, रोजा, सितारे ज़मीन पर और द गोट लाइफ जैसी चर्चित फिल्मों का प्रदर्शन दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा.
- महोत्सव के दौरान दिल्ली पर्यटन एवं प्रसार भारती के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर भी किए गए, जो फिल्म पर्यटन और प्रसारण के क्षेत्र में नए अवसरों को बढ़ावा देगा. महोत्सव 31 मार्च को अपने भव्य समापन की ओर अग्रसर है, जहां अंतिम दिन विविध फिल्मों, संवादों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ इस सप्ताह भर चले सिने उत्सव का समापन होगा.