Kalki Jayanti Kab Hai: हिंदू धर्म में कल्कि जयंती का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है. मान्यता है कि कल्कि भगवान भगवान विष्णु के दसवें और अंतिम अवतार होंगे, जो कलियुग के अंत में प्रकट होंगे. हालांकि भगवान कल्कि का अवतरण अभी नहीं हुआ है, लेकिन उनके भावी अवतार की स्मृति में हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को कल्कि जयंती मनाई जाती है. धार्मिक ग्रंथों में भगवान कल्कि के अवतार से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें मिलती हैं. मान्यता के अनुसार जब कलियुग में अधर्म अपने चरम पर पहुंच जाएगा और धर्म का ह्रास होने लगेगा, तब भगवान विष्णु कल्कि रूप में अवतार लेकर अधर्म का अंत करेंगे और धर्म की फिर से स्थापना करेंगे. इस दिन भगवान विष्णु के कल्कि स्वरूप की पूजा करने से भक्त को भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है. आइए जानते हैं कल्कि जयंती की तिथि, पूजा मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में.
आज मनाई जा रही है कल्कि जयंती
इस बार कल्कि जयंती 18 अगस्त 2026, मंगलवार को मनाई जा रही है. द्रिक पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 17 अगस्त को शाम 5 बजे शुरू हुई और 18 अगस्त को शाम 5:50 बजे समाप्त होगी. कल्कि जयंती की पूजा के लिए शाम का समय शुभ माना गया है. कल्कि जयंती पूजा का मुहूर्त शाम 4:21 बजे से 5:50 बजे तक रहेगा.
कौन हैं भगवान कल्कि?
हिंदू धर्मग्रंथों में भगवान कल्कि को भगवान विष्णु का दसवां अवतार बताया गया है. मान्यता है कि वर्तमान कलियुग के अंतिम चरण में भगवान विष्णु कल्कि रूप में पृथ्वी पर अवतरित होंगे. श्रीमद्भागवत महापुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों में भगवान कल्कि के अवतार के बारे में बताया गया है. मान्यता के अनुसार, उनका जन्म संभल ग्राम में एक ब्राह्मण परिवार में होगा. कल्कि भगवान के स्वरूप का वर्णन एक ऐसे दिव्य योद्धा के रूप में किया गया है, जो सफेद घोड़े पर सवार होकर अधर्म का अंत करेंगे. उनके हाथ में तेजस्वी तलवार होने की बात भी धार्मिक ग्रंथों में कही गई है.
घर पर कैसे करें कल्कि भगवान की पूजा?
अगर आप कल्कि जयंती के दिन मंदिर नहीं जा पा रहे हैं तो घर पर ही भगवान विष्णु के कल्कि स्वरूप की पूजा कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें. इसके बाद घर के पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें. एक चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की तस्वीर स्थापित करें. अगर कल्कि भगवान की तस्वीर उपलब्ध न हो तो भगवान विष्णु की तस्वीर रखकर ही उनकी पूजा की जा सकती है. सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें. इसके बाद भगवान विष्णु और कल्कि भगवान का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें.
भगवान कल्कि को क्या-क्या चढ़ाएं?
पूजा के दौरान भगवान को जल और पंचामृत अर्पित किया जा सकता है. इसके बाद पीले फूल, अक्षत, चंदन और तुलसी दल अर्पित करें. भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व माना जाता है, इसलिए तुलसी दल श्रद्धा से चढ़ाया जा सकता है. भगवान को पीले रंग के वस्त्र या पीला पुष्प अर्पित करना भी शुभ माना जाता है. इसके बाद धूप और दीप जलाकर भगवान की आरती करें.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.
