खामेनेई के जनाजे में खूब भीड़ जुटी लेकिन ईरान के बड़े नेता रहे गायब, पूर्व राष्ट्रपति और मुज्तबा भी नहीं दिखे

ईरान ने अपने पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई विदाई दे दी है. खामेनेई को 9 जुलाई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया. 28 फरवरी 2026 को अमेरिकी-इजरायली एयरस्ट्राइक में उनकी मौत हो गई थी. खामेनेई के जनाजे के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा उनके बेटे मुज्तबा की गैरमौजूदगी की हुई. हालांकि, उनके परिवार के अन्य सदस्य उनके जनाजे में जरूर शामिल हुए.

खामेनेई के जनाजे में नहीं दिखे कई पूर्व राष्ट्रपति

CNN के मुताबिक मुज्तबा सुरक्षा कारणों से जनाजे में शामिल नहीं हुए. लेकिन जनाजे की लाखों लोगों की भीड़ के बीच ईरान के कई बड़ी राजनीतिक हस्तियों की गैरमौजूदगी ने देश के राजनीतिक भविष्य और एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े हुए. खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक करने के दौरान कई पूर्व राष्ट्रपति नजर नहीं आए. इसमें सुधारवादी नेता मोहम्मद खातमी और हसन रूहानी शामिल हैं. इनके साथ खामेनेई के लंबे समय से मतभेद रहे थे.

पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद भी खामेनेई के सुपुर्द-ए-खाक कार्यक्रम के दौरान नदारद रहे. उनके भी संबंध पूर्व सुप्रीम लीडर के साथ खराब हो गए थे. हालांकि, सोमवार यानी 06 जुलाई को वह खामेनेई को दी जा रही अंतिम विदाई के जुलूस में जरूर दिखाई दिए. सालों तक राजनीतिक सुर्खियों से दूर रहने के बाद वह इस तरह सार्वजनिक तौर पर नजर आए.

खामेनेई की अंतिम विदाई में इन बड़े नेताओं की गैर मौजूदगी ने ईरान की राजनीतिक एकजुटता की छवि पर नए सवाल खड़े कर दिए, जिसे ईरानी अधिकारी पेश करना चाहते थे. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है ईरानी अधिकारियों ने जानबूझकर भागीदारी को केवल मौजूदा नेतृत्व के करीबी लोगों तक ही सीमित रखा.

ईरानी नेतृत्व के पास राजनीतिक एकजुटता दिखाने का था शानदार मौका

अमेरिका स्थित ईरान विशेषज्ञ और ‘व्हाट ईरानियंस वांट’ के लेखक अराश अजीज़ी ने कहा कि आयोजक सुधारवादी राजनीति से जुड़े पूर्व राष्ट्रपतियों को खामेनेई के अंतिम विदाई कार्यक्रम में शामिल कर राजनीतिक एकजुटता का प्रदर्शन कर सकते थे. लेकिन इसके बजाय उन्होंने कार्यक्रम में सिर्फ शासन के मुख्य और शीर्ष अधिकारियों को ही शामिल करने का फैसला किया.

खामेनेई के जनाजे कार्यक्रम से ईरान यह संदेश देना चाहता था

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप में ईरान प्रोजेक्ट डायरेक्टर अली वाएज़ ने बताया कि तेहरान अपने सर्वोच्च नेता को खोने के बाद भी यह दिखाना चाहता था कि उसका सिस्टम लगातार काम करता रहेगा. वह शासन की निरंतरता बनाए रख सकता है. भारी भीड़ और सोच-समझकर आयोजित किए गए अंतिम विदाई कार्यक्रम इसकी ओर इशारा भी करते हैं. लेकिन कार्यक्रम से देश की बड़ी गैर-मौजूदगी दुनिया को यह भी बताती है कि उनका नेतृत्व अभी भी खुद को बहुत असुरक्षित महसूस कर रहा है. सबको साथ लेकर चलने की कोशिश नहीं कर रहा है.

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