राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की सुलझेगी गुत्थी? जानिए इससे जुड़े 20 बड़े सवालों के जवाब

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की सुलझेगी गुत्थी? जानिए इससे जुड़े 20 बड़े सवालों के जवाब

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के चढ़ावे में चोरी की जांच जारी रहने के बीच सोमवार को अयोध्या में हुई एक बैठक के दौरान अपने महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए. वहीं ट्रस्टी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नामित किया गया है. ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बताया कि 3 घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में अंतरिम व्यवस्था के तौर पर सदस्य कृष्ण मोहन को महासचिव की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपने का भी निर्णय लिया गया.

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के लिए उपयुक्त उम्मीदवारों का चयन करने के लिए तीन सदस्यीय समिति की घोषणा की. आइये जानते हैं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक और चढ़ावा चोरी से जुड़े 20 सवालों के जवाब…

1- ट्रस्ट का चंपत राय पर क्या रुख है?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन के मामले में पूर्व महासचिव चंपत राय का बचाव करते हुए कहा कि चंपत राय को उन लोगों ने धोखा दिया जिन पर उन्होंने भरोसा किया था. गोविंद देव गिरि ने कहा कि ट्रस्ट के किसी सदस्य ने विश्वासघात नहीं किया. बल्कि चंपत राय के साथ विश्वासघात हुआ. हम उन्हें अत्यंत सज्जन व्यक्ति मानते हैं. लेकिन उन्होंने गलत लोगों पर भरोसा किया और वर्षों तक उन्हें अपने साथ रखा. उन्हीं लोगों ने ट्रस्ट के साथ विश्वासघात किया.

हालांकि गिरि ने यह स्वीकार किया कि चढ़ावे के प्रबंधन की निगरानी में चंपत राय और अनिल मिश्रा की ओर से गंभीर लापरवाही हुई. उन्होंने कहा, यह बिल्कुल सही है. इतने लंबे समय तक उनकी लापरवाही और पर्याप्त निगरानी नहीं होना गंभीर मामला है. ऐसा नहीं होना चाहिए था.

2- क्या सुरक्षित हैं दान की गई सभी 2800 चीजें?

कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बताया कि ट्रस्ट ने मीडिया के सामने मंदिर में चढ़ाई गई कई मूल्यवान वस्तुएं प्रदर्शित कीं, जिनके बारे में पहले चोरी होने के आरोप लगाए गए थे. गिरि ने कहा कि 2,800 वस्तुओं का एक रजिस्टर तैयार किया गया है. जिन पांच वस्तुओं की चर्चा हो रही थी, जिनमें रामचरितमानस की एक पांडुलिपि और भगवान को अर्पित एक सुंदर हार भी शामिल है, उन्हें मीडिया के सामने प्रदर्शित किया गया. इन सभी वस्तुओं का रिकॉर्ड उपलब्ध है और अधिकृत व्यक्ति उनका निरीक्षण कर सकते हैं.

3- ट्रस्ट की नजर में क्या चोरी हुई है?

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने यह स्वीकार किया कि चढ़ावे की चोरी हुई है, लेकिन इसकी मात्रा और इसके लिए जिम्मेदार लोगों का निर्धारण जांच एजेंसियां करेंगी. उन्होंने कहा, यह सही है कि चोरी हुई है, लेकिन यह कितनी बड़ी थी और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इसका पता जांच एजेंसियां लगाएंगी.

4- VIP दर्शन कराने के लिए क्या लिए जाते थे पैसे?

मंदिर में कथित तौर पर वीआईपी दर्शन कराने के लिए धन लेने के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसे आरोप सुने हैं, लेकिन किसी विशेष मामले की पुष्टि नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि मैं यह नहीं कह सकता कि ऐसा कभी नहीं हुआ. मेरे सामने कोई विशिष्ट नाम नहीं आया है, लेकिन मैंने ऐसे आरोप सुने हैं और वे मुझे विश्वसनीय प्रतीत होते हैं.

5- नया CEO चुनने के लिए बनी समिति में कौन-कौन शामिल?

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, हमने जस्टिस (सेवानिवृत्त) प्रदीप कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हवारे (श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष) की तीन सदस्यीय समिति नियुक्त की. यह समिति उम्मीदवारों का साक्षात्कार लेगी और हमें चुनने के लिए तीन नाम देगी.

6- ट्रस्ट के नियमों के तहत मान्य हुआ इस्तीफा?

इस्तीफे पर उठ रहे सवालों पर कोषाध्यक्ष ने कहा कि ट्रस्ट के पास इस मामले में कोई विवेकाधिकार नहीं है क्योंकि वरिष्ठ ट्रस्टी के. परासरन ने बताया कि ट्रस्ट के संविधान के तहत एक बार इस्तीफा देने के बाद यह प्रभावी हो जाता है, जिससे ट्रस्ट के पास इसे स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है. उन्होंने कहा, एक बार जब इस्तीफा सौंप दिया गया, तो उसे स्वीकार या अस्वीकार करने का निर्णय हमारे हाथों में नहीं रह गया था. हमें बस इसे स्वीकार करना था. नियमों के मुताबिक उनका इस्तीफा स्वतः मान्य हो गया है.

7- कौन हैं अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन?

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बताया कि अंतरिम व्यवस्था के तौर पर सदस्य कृष्ण मोहन को महासचिव की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपने का भी निर्णय लिया गया है. उन्होंने कहा कि अंतरिम महासचिव बनाये गए कृष्ण मोहन अपनी सहायता के लिए एक टीम चुनने के लिए स्वतंत्र होंगे जो पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रणालियों को मजबूत करने के उद्देश्य से उपायों की निगरानी करेगी.

8- अब अगली बैठक कब करेगा ट्रस्ट?

गोविंद देव गिरि ने कहा कि ट्रस्ट 22 जुलाई को फिर से बैठक करेगा, तब तक उसे उम्मीद है कि कथित गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगी. उन्होंने कहा कि बैठक में अतिरिक्त ट्रस्टियों की नियुक्ति के साथ रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी.

9- गोविंद देव गिरि ने राम भक्तों से की अपील?

गिरि ने कहा कि ट्रस्ट चाहता है कि बड़े साजिशकर्ताओं समेत कथित चोरी में शामिल सभी लोगों की पहचान की जाए और उन्हें दंडित किया जाए. उन्होंने इस विवाद का इस्तेमाल मंदिर ट्रस्ट को बदनाम करने और भक्तों के बीच विभाजन पैदा करने के प्रयासों के प्रति आगाह किया. उन्होंने भक्तों से ‘झूठे प्रचार’ से गुमराह न होने की अपील करते हुए कहा कि अगर किसी को दान की गई वस्तुओं के बारे में संदेह है तो वह सत्यापन के लिए ट्रस्ट कार्यालय से संपर्क कर सकता है.

10- क्या बोले अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन?

अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने बैठक के बाद कहा कि जो भी दोषी पाया जाएगा उसे उचित सजा मिलेगी. उन्होंने कहा कि सभी ट्रस्टी लोगों के विश्वास को बहाल करने और राम मंदिर ट्रस्ट के उद्देश्यों के अनुसार भक्तों द्वारा किए जाने वाले चढ़ावे का प्रबंधन करने के लिए काम करेंगे.

11- ट्रस्ट ने क्यों बुलाई थी बैठक?

यह बैठक राम जन्मभूमि मंदिर परिसर के अंदर सोमवार दोपहर करीब सवा तीन बजे शुरू हुई, जिसमें ट्रस्ट के नौ स्थायी सदस्यों में से सात ने भाग लिया. यह बैठक शाम करीब साढ़े छह बजे खत्म हुई. मंदिर के चढ़ावे के गबन के आरोपों के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा द्वारा दिए गए इस्तीफे पर विचार-विमर्श करने, मामले की एसआईटी जांच की प्रगति की समीक्षा करने और इस्तीफे स्वीकार किए जाने पर ट्रस्ट में प्रमुख पदों पर नियुक्तियों पर चर्चा करने के लिए यह बैठक बुलाई गई थी.

12- चढ़ावा चोरी मामले में अब तक की कार्रवाई?

मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एक एसआईटी ने पिछले महीने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके बाद एक प्राथमिकी दर्ज की गई और आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. जांचकर्ताओं ने हटाए गए सीसीटीवी फुटेज भी बरामद किए हैं, जिसमें कुछ आरोपी मंदिर परिसर से बाहर जाते समय कथित तौर पर नोटों को छिपाते हुए नजर आ रहे हैं.

13- एसआईटी की जांच में क्या हुआ खुलासा?

राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक जांच में पाया है कि चढ़ावे की गिनती के दौरान कर्मचारियों द्वारा कई बार नकदी छिपाने के कथित मामले सामने आए हैं. एसआईटी ने सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली में भी गंभीर खामियों की ओर संकेत किया है. एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी गई है.

14- सीसीटीवी फुटेज में क्या आया सामने?

प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, 27 अप्रैल से पांच जून के बीच के सीसीटीवी फुटेज में कई अवसरों पर कर्मचारियों को गिनती कक्ष के भीतर कथित तौर पर नोटों की गड्डियां और खुली नकदी अपने कपड़ों, जेबों, जूतों तथा अन्य स्थानों पर छिपाते हुए देखा गया. रिपोर्ट में ऐसी लगभग 70 संदिग्ध घटनाओं का जिक्र किया गया है. एसआईटी के मुताबिक ये अनियमितताएं अलग-अलग घटनाएं नहीं थीं, बल्कि कई दिनों तक अपनाई गई एक सुनियोजित और बार-बार दोहराई जाने वाली प्रक्रिया प्रतीत होती हैं.

15- क्या सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया?

जांच दल ने पाया कि गिनती कक्ष में निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया. प्रवेश और निकास के समय कर्मचारियों की तलाशी नहीं ली जाती थी, उनके निजी सामान पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं था, कई दानपात्रों की नकदी एक साथ गिनी जाती थी तथा मूल्यवान चढ़ावे के अभिलेखीकरण और सत्यापन में गंभीर कमियां थीं.

16- प्रारंभिक जांच में कौन-कौन चोरी में शामिल?

रिपोर्ट में अविनाश शुक्ला, अनुकूल मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और राम शंकर मिश्रा का नाम लेते हुए कहा गया है कि प्रथम दृष्टया इनकी संलिप्तता सामने आई है. इन सभी आरोपियों सहित कुल आठ लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. रिपोर्ट के अनुसार, जांच शुरू होने से पहले कुछ कर्मचारियों के पास से लगभग 78.94 लाख रुपये बरामद किए गए थे. रिपोर्ट में चार जून को गिनती कक्ष से लगभग 2.25 लाख रुपs बरामद होने का भी जिक्र किया गया है.

17- बैंक खातों में जांच में क्या मिला?

एसआईटी ने कहा कि संबंधित कर्मचारियों के बैंक खातों की जांच में उनकी घोषित आय की तुलना में अधिक नकद जमा और वित्तीय लेनदेन पाए गए हैं, जिसके मद्देनजर विस्तृत वित्तीय जांच की आवश्यकता है.

18- क्या निगरानी व्यवस्था में हुई चूक?

रिपोर्ट में ट्रस्ट की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं. इसमें कहा गया है कि सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुपालन, कर्मचारियों की तलाशी तथा पर्यवेक्षण में गंभीर कमियों के कारण कथित चोरी और गबन संभव हो पाया.

19- कब किया गया था एसआईटी का गठन?

उत्तर प्रदेश सरकार ने एक जुलाई को एसआईटी के कार्यकाल में 15 दिन का विस्तार किया था. राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित चोरी और गबन के आरोपों की जांच के लिए 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया था.

20- कब सामने आया राम मंदिर चढ़ावे का विवाद?

यह विवाद सात जून को उस समय शुरू हुआ था, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे के गबन का आरोप लगाया था. उस समय चंपत राय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि आंतरिक लेखा परीक्षण के दौरान कोई उल्लेखनीय अनियमितता सामने नहीं आई.

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