Viral Video: बंदर और उसकी मां को मिला नया परिवार, सोशल मीडिया पर छाया दिल छू लेने वाला वीडियो

Ichikawa के एक चिड़ियाघर से जुड़ी एक नन्हे बंदर की कहानी इन दिनों इंटरनेट पर लोगों के दिलों को छू रही है. सिर्फ सात महीने का यह छोटा सा बंदर, जिसका नाम पंच है, अपनी मासूमियत और जज़्बे की वजह से दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है. उसकी जिंदगी की शुरुआत आसान नहीं रही, लेकिन जिस तरह उसने हालात का सामना किया, वह हर किसी को भावुक कर देता है. पंच का जन्म तो जनरल तरीके से हुआ, लेकिन कुछ ही समय बाद उसकी मां ने उसे अपनाने से इनकार कर दिया. मां का साया सिर से उठ जाना किसी भी बच्चे के लिए बहुत बड़ा सदमा होता है, और पंच भी इससे अछूता नहीं रहा. वह छोटा था, कमजोर था और सबसे बड़ी बात अकेला था. उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह किसके सहारे रहे. उसके आसपास सब कुछ होते हुए भी उसे खालीपन महसूस होता था.

चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने जब उसकी हालत देखी तो उन्हें एहसास हुआ कि उसे सिर्फ भोजन और देखभाल ही नहीं, बल्कि भावनात्मक सहारे की भी जरूरत है. इसी सोच के साथ उन्होंने उसे एक मुलायम खिलौना दिया. यह साधारण सा खिलौना पंच के जीवन में असाधारण भूमिका निभाने लगा. उसने उस खिलौने को ऐसे अपनाया जैसे वह उसकी मां हो, उसका दोस्त हो, उसका अपना कोई हो. वह उसे सीने से लगाकर बैठता, उसके साथ सोता और हर वक्त उसे थामे रहता.

क्या दिखा इस वीडियो में?

इस खिलौने का नाम ओरा-मामा रखा गया. पंच और उसके ओरा-मामा की तस्वीरें और वीडियो जब सोशल मीडिया पर सामने आए, तो लोगों की आंखें नम हो गईं. वीडियो में देखा जा सकता था कि पंच खिलौने से ऐसे चिपका रहता था मानो उसे डर हो कि कहीं यह भी उससे दूर न हो जाए. उसकी मासूम हरकतों ने लाखों लोगों का दिल जीत लिया. सोशल मीडिया पर #KeepGoingPunch जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे और लोग उसे हौसला देने लगे.

हालांकि शुरुआत में पंच अपने खिलौने की दुनिया में ही सिमटा रहता था. वह दूसरे बंदरों से दूरी बनाए रखता था. शायद उसके मन में असुरक्षा थी, या फिर वह नए रिश्तों से घबराता था. चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने धैर्य और समझदारी से काम लिया. उन्होंने उसे धीरे-धीरे अन्य बंदरों के संपर्क में लाना शुरू किया. शुरुआत में पंच थोड़ा सहमा-सहमा रहता था. वह दूर बैठकर बाकी बंदरों को देखता, लेकिन पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था.

समय के साथ बदलाव आने लगा. कर्मचारियों की देखरेख और प्यार भरे माहौल में पंच ने धीरे-धीरे अपने डर को कम करना शुरू किया. एक दिन वह झिझकते हुए अपने नए साथियों के करीब गया. पहले हल्की सी दूरी, फिर थोड़ी जिज्ञासा, और आखिरकार दोस्ती. यह बदलाव देखने लायक था. जो पंच कभी अकेला बैठा रहता था, अब वही अपने साथियों के साथ खेलता, कूदता और मस्ती करता नजर आने लगा.

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वीडियो में साफ दिखता है कि उसका आत्मविश्वास कैसे बढ़ा. पहले जो आंखें सहमी हुई लगती थीं, अब उनमें चमक थी. वह अब सिर्फ अपने खिलौने तक सीमित नहीं था, बल्कि अपने झुंड के साथ घुलने-मिलने लगा था. हालांकि ओरा-मामा अब भी उसके पास रहता है, लेकिन अब वह सिर्फ सहारे का प्रतीक है, उसकी पूरी दुनिया नहीं.

यहां देखिए वीडियो

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